क्या मोदी सरकार ने चांदी की तस्करी को बढाने के रास्ते खोल दिए है ? रिपोर्ट नाइश हसन




क्या मोदी सरकार ने चांदी की तस्करी को बढाने के रास्ते खोल दिए है ?

रिपोर्ट नाइश हसन


भारत सरकार ने अभी हाल ही में चांदी के आयात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आर्थिक साझेदारी समझौते के तहत UAE से चांदी के आयात पर  भारी छूट देने का फैसला लिया। इसके नतीजे में अब UAE से चांदी पर आयात शुल्क घटा दिया गया है। 

मोदी सरकार का कहना है कि ऐसा उन्होने चांदी के आयात को प्रोत्साहित करने के लिए किया। ऐसा बताया गया कि इसका उद्देश्य है आभूषण निर्माताओं को कच्चा माल आसानी से उपलब्ध कराना और कीमतों में स्थिरता बनाए रखना। 

एक नजर में तो यह बात बड़ी सीधी सच्ची सी नजर आती है, लेकिन इस फैसले पर और भी प्रतिक्र्रिया आनी शुरू हो गई है, जिस पर भी बात होना जरूरी है। 

पिछले पचास वर्षो पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि चांदी के आयात शुल्क में कई बडे बदलाव हुए है। 1980 के दशक में, आयात शुल्क बहुत अधिक थे, यानि 100% से भी अधिक। 1990 के दशक में उदारीकरण के बाद, इन शुल्कों को धीरे-धीरे कम किया गया। 2000 के दशक में, शुल्कों में और कमी की गई, और 2010 के दशक में शुल्कों को 10% के आसपास स्थिर किया गया। हाल ही में, इस CEPA  समझौते के तहत UAE से चांदी के आयात शुल्क को घटा कर 8%कर दिया गया है। 

2024 की शुरूआत में, भारत ने UAE से 2,932 टन चांदी का आयात किया, जो 2023 के कुल आयात से काफी ज्यादा रहा। 

आप को बता दें कि इस समझौते के बाद UAE से आयात होने वाली चांदी पर आयात शुल्क लगेगा मात्र 8% जबकि अन्य देशों से आयात शुल्क है 15% । इस कम शुल्क ने निजी व्यापारियों को UAE से बडी मात्रा में चांदी आयात करने के लिए प्रेरित किया है। 

ये एक बात है लेकिन इस शुल्क अंतर को कई लोग तस्करी के समान मानते हैं क्योंकि इससे सरकारी राजस्व में कमी हो रही है और व्यापार में विकृतियां उत्पन्न हो रही है। ऐसा माना जा रहा है कि इससे चांदी तस्करी का रास्ता खुल गया है।

आप को मालूम हो कि भारतीय बैंक चांदी आयात और व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे न केवल चांदी का अयात करते हैं बल्कि वित्तीय उत्पादों जैसे चांदी ईटीएफ और चांदी आधारित निवेश योजनाओं को भी बढावा देते है, आयातित चांदी को सुरक्षित रखने और बाजार में आपूर्ति को संतुलित करने की जिम्मेदारी होती है। बैंक आभूषण निर्माताओं और व्यापारियों को भी चांदी की आपूर्ति करते है। अब बैंकों के सामने भी स्थिति दुविधाजनक है। 

जिस नजरिए से मोदी सरकार ने आभूषण व्यापारियों को लाभ पहुंचाने की गरज से ये फैसला लिया दरअसल ये बहुत छोटे नजरिए से एक बड़ा गलत फैसला लिया गया, क्योंकि चांदी का रिश्ता महज आभूषण व्यापारियों तक ही नहीं है, चांदी एक ऐसी धातु है जिसका प्रयोग आभूषण से ज्यादा अन्य कामों में है। 

अब जानते हैं कहां और कैसे उपयोग होती है चांदी-

 इलेक्ट्रिकल कनेक्टर: चांदी की उच्च विद्युत चालकता के कारण इसका उपयोग इलेक्ट्रिकल कनेक्टर बनाने में किया जाता है, जो कारों में बिजली का प्रवाह सुचारू रूप से सुनिश्चित करता है। यह बिजली के नुक्सान को कम करने और कार्यक्षमता बढाने में सहायक है। 

सेंसर- चांदी का अपयोग सेंसर, पे्रशर सेंसर, और अन्य सेंसर बनाने में किया जाता है जो कार की विभिन्न प्रणालियों को नियंत्रित करते हैं जैसे इंजन, ब्रेक और एयर बैग।

उत्प्रेरक कन्वर्टर- चांदी का उपयोग उत्प्रेरक कन्वर्टर में कार के निकास में मौजूद हानिकारक गैसों को कम करने के लिए भी किया जाता है। यह वाहनों से उत्सर्जित प्रदूषण को कम करने में सहायक है।

 एयरबैग- चांदी का उपयोग एयरबैग में विस्फोटक पदार्थो को सक्रिय करने वाले उपकरणों में किया जाता है। यह एयरबैग के सही समय पर सक्रिय होने और आवश्यक सुरक्षा प्रदान करने में सहायक है। 

उच्च विद्युत चालकता- चांदी की उच्च विद्युत चालकता इसे इलेक्टानिक्स के लिए एक आदर्श धातु बनाती है। यह बिजली का प्रवाह सुचारू रूप से करती है और उर्जा का नुकसान कम करती है।

ज़ंग रोधक- चांदी ज़ंग प्रतिरोधी होती है, जिससे यह बाहरी वातावरण में उपयोगी होती है और खराब नहीं होती। यह कार के विभन्न भागों में काफी लंबे समय तक प्रयोग में रहती है। 

ऊष्मा चालकता- चांदी ऊष्मा का भी एक अच्छा चालक है, जिसका उपयोग कार के इंजन और अन्य उपकरणों कोे ठंडा रखने में किया जाता है। 

चलिए साथ-साथ यह भी जान लेते हैं कि कहां कितनी है चांदी की सालाना खपत - 

दुनिया: चांदी की आटोमोटिव उद्योग में सालाना खपत लगभग 100 टन है। 

जापान - जापान आटोमोटिव उद्योग में चांदी का सबसे बड़ा उपभेक्ता है। 

अमेरिका: दूसरे नंबर पर है।

भारतः भारत में चांदी की आटोमेटिव उद्योग में खपत अभी बहुत कम है। हालांकि देश में वैश्विक बाजार में बढती मांग को देखते हुए, भारत में चांदी की खपत में भविष्य में बढोत्तरी होने की संभावना है। हमारे देश मेचांदी के जेवर भी काफी प्रचलित है। यह आभूषण बनाने के लिए काफी आम धतु है। 

सिक्के- बनाने के लिए चांदी का इस्तेमाल सदियों से किसा जाता रहा है। कई देशों में आज भी चांदी के सिक्के चलन में हैं। 

इलेक्ट्रानिक उपकरण- इसके अलावा चांदी का ज्यादा इस्तेमाल इलेक्टानिक उपकरणों में चालक के रूप में किया जाता है, जैसे कंप्यूटर, मोबाइल फोन, टेलीवीजन आदि। 

फोटोग्राफी - में भी चांदी का इस्तेमाल खूब होता है। चांदी हेलोजन का इस्तेमाल फोटोग्राफी में फिल्म और प्रिंट बनाने के लिए किया जाता है। 

चांदी का इस्तेमाल सोलर पैनलों में फोटोवोल्टिक कोशिकाओं के निर्माण में किया जाता है।

बर्तन- भारत में चांदी के बर्तनों का भी खूब इस्तेमाल होता है। ये बर्तन उच्च गुणवत्ता वाले माने जाते हैं और खाना पकाने में इस्तेमाल किए जाते है।

इसके साथ ही चांदी का इस्तेमाल दवा बनाने में भी खूब होता है। चांदी अपने एंटीबैक्टीरियल और ऐटी फंगल गुणों के कारण दवाओं और चिकित्सा उपकरणों मेंखूब इस्तेमाल होती है। 

दंत चिकित्सा - चांदी का इस्तेमाल दंत चिकित्सा में फिलिंग और क्राउन बनाने के लिए किा जाता है। 

चांदी के तत्वों का प्रयोग कई दवाओं में किया जाता है-

1 सिल्वर सल्फाडायजाइन- यह ऐटी बैक्टीरियत क्रीम है, जो जलने से होने वाले संक्रमणों के इलाज के लिए उपयोग की जाती है। 

2 सिल्वर नाइट्रेट- इस यौगिक का उपयोग मस्सें के इलाज में, संक्रमण को दूर करने के लिए, और नवजात शिशुओं की आंखों में संक्रमण रोकने के लिए किया जाता है। 

3 सिल्वर क्लोराइड- इस यौगिक का उपयोग एंटीसेप्टिक के रूप में और कुछ प्रकार के संक्रमण के इलाज में किया जाता है। 

4 सिल्वर थियोसल्फेट- यह यौगिक विषाक्त पदार्थो के इलाज में उपयोग किया जाता है। 

कुछ देश चांदी के उत्पादन में और उनके निर्यात में काफी आगे है, यह सूची बिल्कुल सटीक नहीं हो सकती है क्योंकि इस डेटा को खुले तौर पर प्रकाशित नहीं किया जाता है। 

अनुमानित सूची- 

मैक्सिकोः चांदी के उत्पादन और निर्यात में अग्रणी देश

पेरूः चांदी के उत्पादन और निर्यात में अग्रणी देश

चिलीः चांदी के उत्पादन और निर्यात में अग्रणी देश

चीनः चांदी के उत्पादन और निर्यात में अग्रणी देश

आस्टेलियाः चांदी के उत्पादन और निर्यात में अग्रणी देश

अमेरिकाः चांदी के उत्पादन और निर्यात में अग्रणी देश

पोलैंडः चांदी का बड़ा निर्यातक

कनाडाः चांदी का बड़ा निर्यातक

बोलीवियाः चांदी का बड़ा निर्यातक

रूसः चांदी का बड़ा निर्यातक

मोदी सरकार द्वारा खामोशी से किया गया UAE  के साथ मुक्त व्यापार समझौता, भारतीय चांदी बाजार में तबाही लाने वाला फैसला साबित हो रहा है, यह एक प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है, जिसके बारे में जानना बेहद जरूरी है। 

1 घरेलू उद्योगों को नुकसान- सीईपीए के तहत, यूएई से चांदी आयात में कमी या शुल्क के अभाव के कारण, भारतीय चांदी उत्पादाकों और रिफाइनरियों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। उनके व्यवसाय कमजोर पड़  सकते हैं और रोजगार नष्ट हो सकता है।

2 मुद्रा भंडारण पर दबाव- बढते चांदी आयात से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ सकता है, क्ययोंकि आयात के लिए भुगतान विदेशी मुद्रा में करना पड़ता है। यह मुद्रा की अस्थिरता और भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकरात्मक प्रभाव डाल सकता है। 

3 तस्करी बढने का आसार- सीईपीए के कारण चांदी की कीमतें कम होने से तस्करों को अवैध रूप से चंदी लाने और मुनाफा कमाने का प्रेात्साहन मिल सकता है। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो सकता है और कालाबाजारी बढ सकती है। 

4 नियंत्रण की कमी- सीईपीए के कारण चांदी के आयात पर नियंत्रण कम हो सकता है। सरकार की चांदी बाजार पर पकड़ कमजोर हो सकती है, जिससे अनियमितताओं और गडबडियों का खतरा बढ सकता है। अपने घरेलू आजार को इस बुरे दौर में और नुकसान पहुंचाना सरकार की समझदारी नहीं कहला सकती। 

इस समझौते का कुल मक्सद जो सामने नजर आता है वह यह है कि अपने चहेते आभूषण निर्माताओं को इसका लाभ पहुंचाना। लेकिन इसका बड़ा नुक्सान जो हो रहा है वह यह है कि यह समझौता घरेलू चांदी उद्योग और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर नकरात्मक प्रभव भी डाल सकता है। तस्करी को रोकने और घरेलू एद्योग को बढावा देने के लिए , सरकार को चांदी की आयात नीतियों में संतुलन लाने की जरूरत है। 

#नाइश हसन







 






 

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